➤ आरक्षण रोस्टर नियम बदलने पर विधानसभा में जोरदार हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
➤ सरकार ने 5 फीसदी पंचायत आरक्षण का अधिकार डीसी को देने का किया प्रावधान
➤ बीजेपी ने फैसले को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताते हुए लगाया साजिश का आरोप
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पंचायत चुनावों के आरक्षण रोस्टर नियमों में बदलाव को लेकर बुधवार को जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला। सरकार द्वारा 5 प्रतिशत पंचायतों के आरक्षण का अधिकार डीसी को देने के फैसले पर विपक्ष ने सदन के भीतर और बाहर तीखा विरोध दर्ज कराया। इस मुद्दे पर बीजेपी विधायकों ने काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की, लेकिन स्पीकर द्वारा अनुमति न दिए जाने पर सदन में जमकर हंगामा हुआ और आखिरकार विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल से पहले ही बीजेपी विधायक विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए और सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र का गला घोंटने वाला फैसला करार दिया। सदन के भीतर भी माहौल गरमा गया, जिसके चलते स्पीकर को कार्यवाही 11:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी रही।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू बार-बार ऐसे फैसले लेते हैं, जिनसे पूरे प्रदेश में सरकार की किरकिरी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों को पहले टालने की कोशिश की गई और अब जब चुनाव का आरक्षण रोस्टर जारी होना था, तब नियमों में अचानक बदलाव कर दिया गया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि 31 मार्च को रोस्टर जारी होना था, लेकिन सरकार ने उससे ठीक पहले नियमों में नया प्रावधान जोड़ दिया। इसके तहत 95 प्रतिशत पंचायतों में आरक्षण पुराने नियमों के अनुसार होगा, जबकि 5 प्रतिशत पंचायतों को आरक्षित करने का अधिकार डीसी को दे दिया गया है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 243(D) का उल्लंघन बताते हुए कहा कि आरक्षण का आधार जनसंख्या होना चाहिए, न कि प्रशासनिक विवेक। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह कदम “अपने लोगों के लिए चुनिंदा पंचायतों को ओपन करने की साजिश” है।
सरकार की ओर से संशोधित नियमों में तर्क दिया गया है कि यह बदलाव भौगोलिक और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि कुछ संवेदनशील या विशेष क्षेत्रों में प्रशासनिक स्तर पर व्यावहारिक निर्णय लिया जा सके।
प्रदेश में 3773 पंचायतों और 73 नगर निकायों में 31 मई से पहले चुनाव कराए जाने हैं। पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए चुनाव होने हैं, जबकि शहरी निकायों में पार्षदों का चयन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पंचायत जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को ही समाप्त हो चुका है और फिलहाल कई जगह एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त हैं।
इस मुद्दे ने पंचायत चुनावों से पहले प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।



